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मुलेठी के फायदे और तासीर — गले की खराश में ‘मीठी जड़’ कितनी कारगर है और किसे इससे बचना चाहिए

मुलेठी के फायदे और तासीर – गले की खराश में 'मीठी जड़' कितनी कारगर?

संक्षिप्त उत्तर

मुलेठी की तासीर ठंडी (शीत) होती है। यह मीठी, चिकनी जड़ वात और पित्त को शांत करती है और गले की खराश, सूखी खांसी व पेट की जलन में पारंपरिक रूप से भरोसेमंद मानी जाती है। लेकिन इसका ग्लाइसिराइज़िन BP बढ़ा सकता है, इसलिए हाई BP, दिल-किडनी रोग और गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

मुख्य बातें

  • मुलेठी की तासीर ठंडी है; यह वात-पित्त शांत करती है पर ज़्यादा मात्रा में कफ बढ़ा सकती है।
  • गले की खराश और सूखी खांसी में एक छोटा टुकड़ा चूसना सबसे पुराना घरेलू तरीका है।
  • ग्लाइसिराइज़िन सोडियम रोक सकता है और पोटैशियम घटा सकता है, जिससे BP बढ़ सकता है।
  • हाई BP, दिल या किडनी की बीमारी, गर्भावस्था और डाययूरेटिक/स्टेरॉयड लेने वाले सावधान रहें।
  • कुछ दिन गले के लिए लेना और महीनों तक रोज़ चूर्ण खाना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।

किसी गायक से पूछिए कि रियाज़ से पहले गले को कैसे तैयार करते हैं, तो कई लोग जेब से एक छोटी-सी भूरी लकड़ी निकालकर दिखाएंगे। यह है मुलेठी, वह जड़ जो बिना चीनी के भी मीठी लगती है। सर्दियों में जब गला बैठ जाता है या सूखी खांसी रात भर सोने नहीं देती, तब मुलेठी घर-घर में याद की जाती है।

लेकिन मुलेठी जितनी मीठी है, उतनी ही "ताकतवर" भी है। ज़्यादा मात्रा में लंबे समय तक लेने से यह ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकती है, और यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। इस लेख में मुलेठी के फायदे, उसकी तासीर, सही इस्तेमाल और नुकसान, सब कुछ एक जगह समझिए।

मुलेठी क्या है?

मुलेठी (Glycyrrhiza glabra) मटर-परिवार का एक बहुवर्षीय पौधा है, जिसकी जड़ और भूमिगत तना औषधि के रूप में इस्तेमाल होते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Licorice या Liquorice कहते हैं। संस्कृत में इसका नाम यष्टिमधु है, यानी "मीठी लकड़ी"। इसे मधुयष्टि और जेठीमधु भी कहा जाता है।

इसका मीठापन ग्लाइसिराइज़िन नाम के तत्व से आता है, जो साधारण चीनी से कई गुना ज़्यादा मीठा होता है। यही तत्व मुलेठी के कई फायदों और कुछ नुकसानों, दोनों के पीछे है।

मुलेठी की तासीर: गर्म या ठंडी?

मुलेठी की तासीर ठंडी होती है। आयुर्वेद में इसके गुण इस प्रकार हैं:

गुण मुलेठी (यष्टिमधु) में
रस मधुर (मीठा)
गुण गुरु (भारी), स्निग्ध (चिकनाई वाली)
वीर्य (तासीर) शीत (ठंडी)
विपाक मधुर
दोष पर असर वात और पित्त को शांत करती है; अधिक मात्रा में कफ बढ़ा सकती है

ठंडी और चिकनी होने के कारण मुलेठी सूखी, खुरदुरी और जलन वाली खांसी में सबसे ज़्यादा काम की मानी जाती है। वहीं जिनको बहुत गाढ़ा बलगम है, उनके लिए अकेली मुलेठी की बजाय अडूसा या अदरक जैसी गर्म-रूखी चीज़ों के साथ इसका संयोजन बेहतर माना जाता है।

चरक संहिता में मुलेठी को कंठ्य (गले के लिए हितकारी) और जीवनीय (जीवन शक्ति बढ़ाने वाली) औषधियों में गिना गया है। इसी परंपरा से "गला बैठा है तो मुलेठी चूसो" वाली सलाह आई है।

मुलेठी के 7 प्रमुख फायदे

  1. गले की खराश और आवाज़ बैठना: मुलेठी गले की अंदरूनी परत पर एक सुरक्षात्मक, चिकनी परत-सी बनाती है, जिससे खराश और चुभन में आराम मिलता है। शिक्षक, गायक और ज़्यादा बोलने वाले लोग इसे इसीलिए पसंद करते हैं।
  2. सूखी खांसी में राहत: मीठा और स्निग्ध गुण सूखेपन को कम करता है। शहद के साथ मुलेठी चूर्ण सूखी खांसी का पारंपरिक नुस्खा है।
  3. पेट की जलन और एसिडिटी: मुलेठी पेट की अंदरूनी झिल्ली को सहारा देने के लिए जानी जाती है। इसके लिए ग्लाइसिराइज़िन-रहित एक ख़ास रूप, DGL (Deglycyrrhizinated Licorice), पर भी शोध हुआ है, जिसमें BP वाला जोखिम काफ़ी कम माना जाता है।
  4. मुंह के छाले: पित्त शांत करने वाली तासीर के कारण मुलेठी के काढ़े से कुल्ला करना छालों में एक पुराना उपाय है।
  5. त्वचा की देखभाल: मुलेठी में मौजूद ग्लैब्रिडिन जैसे तत्वों पर त्वचा के दाग-धब्बों और रंगत के संदर्भ में शोध हुआ है। इसी कारण कई फ़ेस-पैक और क्रीम में मुलेठी का अर्क मिलता है।
  6. तनाव और थकान: आयुर्वेद में मुलेठी को रसायन (पुनर्जीवन देने वाली) औषधियों में गिना गया है। अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों के साथ यह शक्ति और स्फूर्ति देने वाले योगों का हिस्सा रही है।
  7. दूसरी जड़ी-बूटियों का स्वाद और असर संतुलित करना: बहुत कड़वे काढ़ों में थोड़ी मुलेठी डालने से स्वाद सुधरता है और उनका रूखापन संतुलित होता है।

मुलेठी कैसे खाएं? 4 आसान तरीके

  • चूसना: मुलेठी की एक छोटी डंडी (लगभग 2 इंच) को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें। आवाज़ बैठने पर यह सबसे सरल तरीका है।
  • चूर्ण और शहद: एक चौथाई से आधा छोटा चम्मच मुलेठी चूर्ण, एक छोटा चम्मच शहद में मिलाकर दिन में एक-दो बार चाटें।
  • मुलेठी की चाय: एक कप पानी में एक छोटा टुकड़ा मुलेठी, थोड़ी अदरक और 2-3 तुलसी पत्ते डालकर 5 मिनट उबालें। चीनी डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • गरारे: मुलेठी को पानी में उबालकर, गुनगुना होने पर उससे गरारे करें।

मात्रा पर ध्यान दें: आयुर्वेदिक ग्रंथों में मुलेठी चूर्ण की सामान्य मात्रा लगभग 1 से 3 ग्राम प्रतिदिन बताई जाती है। खांसी-ज़ुकाम में इसे थोड़े समय के लिए लें। कई हफ़्तों तक लगातार लेने से पहले चिकित्सक से बात करें।

मुलेठी के नुकसान: यह सावधानी सबसे ज़रूरी है

मुलेठी का ग्लाइसिराइज़िन शरीर में सोडियम रोकने और पोटैशियम घटाने का काम कर सकता है। लंबे समय तक ज़्यादा मात्रा में लेने पर इसका नतीजा हो सकता है:

  • ब्लड प्रेशर बढ़ना
  • हाथ-पैरों में सूजन (पानी रुकना)
  • पोटैशियम की कमी, जिससे मांसपेशियों में कमज़ोरी या धड़कन में गड़बड़ी हो सकती है

इसलिए इन लोगों को मुलेठी डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए:

  1. हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़
  2. दिल या किडनी की बीमारी वाले लोग
  3. गर्भवती महिलाएं — शोध में ज़्यादा मुलेठी के सेवन को गर्भावस्था के लिए जोखिम भरा पाया गया है
  4. डाययूरेटिक (पेशाब की दवा), स्टेरॉयड या दिल की दवा लेने वाले
  5. कम पोटैशियम की समस्या वाले लोग

एक-दो दिन गले के लिए मुलेठी चूसना और महीनों तक रोज़ चूर्ण खाना, ये दो बिल्कुल अलग बातें हैं। मात्रा और अवधि, दोनों सीमित रखें।

मुलेठी, शहद और अदरक: सर्दियों का गला-रक्षक काढ़ा

सर्दियों में यह सरल काढ़ा बहुत से घरों में बनता है:

  1. डेढ़ कप पानी में एक इंच मुलेठी, आधा इंच कुटी अदरक, 4-5 तुलसी पत्ते और 2 काली मिर्च डालें।
  2. धीमी आंच पर लगभग 7-8 मिनट उबालें।
  3. छानकर गुनगुना होने पर एक छोटा चम्मच शहद मिलाएं।

यहां अदरक और काली मिर्च की गर्मी मुलेठी की ठंडक और भारीपन को संतुलित करती है, इसलिए यह संयोजन कफ वाली खांसी में भी लिया जाता है।

अच्छी मुलेठी कैसे पहचानें?

  • असली मुलेठी की डंडी बाहर से भूरी और झुर्रीदार, अंदर से पीली-सी रेशेदार होती है।
  • चबाने पर पहले हल्का कड़वापन और फिर साफ़, गहरी मिठास आती है।
  • बहुत पुरानी, फफूंद लगी या बेहद सूखी, बेस्वाद डंडियां न लें।
  • चूर्ण खरीदते समय भरोसेमंद ब्रांड और पैक पर लिखी निर्माण तिथि देखें।

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निष्कर्ष

मुलेठी ठंडी तासीर वाली, मीठी और चिकनी जड़ है, जो गले की खराश, सूखी खांसी और पेट की जलन में पारंपरिक रूप से सबसे भरोसेमंद मानी जाती है। इसका फ़ायदा तभी है जब मात्रा सीमित हो और BP, दिल, किडनी या गर्भावस्था जैसी स्थितियों में सावधानी बरती जाए। अगर आप तय मात्रा में, बिना झंझट के मुलेठी लेना चाहते हैं, तो मानकीकृत मुलेठी कैप्सूल एक विकल्प है। 👉 Aarogya Jeevanam के Mulethi (Licorice) Capsules देखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुलेठी रोज़ खा सकते हैं?

थोड़े समय के लिए और कम मात्रा में, हां। लंबे समय तक रोज़ लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लें, ख़ासकर अगर BP की समस्या है।

मुलेठी गर्म है या ठंडी?

आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी की तासीर ठंडी (शीत वीर्य) होती है।

क्या डायबिटीज़ वाले मुलेठी ले सकते हैं?

मुलेठी का मीठापन चीनी जैसा नहीं है, फिर भी डायबिटीज़ और BP अक्सर साथ होते हैं। डॉक्टर से पूछकर ही लें।

बच्चों को मुलेठी दे सकते हैं?

बहुत कम मात्रा में, कुछ दिनों के लिए पारंपरिक रूप से दी जाती है, लेकिन बाल-रोग विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है।