दिवाली से पहले के हफ्ते मेरे लिए हमेशा स्क्रीन के हफ्ते होते हैं। ऑफिस का काम पूरा करना, ऑनलाइन गिफ्ट ढूंढना, रात को फोन पर सेल देखते रहना। पिछले साल इसी समय शाम होते-होते मेरी आंखें ऐसी लगने लगती थीं जैसे उनमें रेत चली गई हो। जलन, भारीपन, और बार-बार आंखें मलने का मन। तब समझ आया कि आंखें भी आराम मांगती हैं।
अगर आप आंखों में जलन का आयुर्वेदिक उपाय या सूखी आंखों की वजह खोज रहे हैं, तो इस लेख में मैं बताऊंगा कि इस मौसम में आंखें क्यों सूखती हैं, आयुर्वेद इसे कैसे देखता है, कौन-सी रोज़ की आदतें मदद करती हैं, और किन संकेतों पर तुरंत आंखों के डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
इस मौसम में आंखें क्यों सूखती और जलती हैं
तीन चीज़ें एक साथ हो रही हैं। पहली, स्क्रीन। जब हम स्क्रीन पर ध्यान से देखते हैं, तो पलकें सामान्य से बहुत कम झपकती हैं। हर बार पलक झपकने पर आंख पर आंसू की एक पतली परत फैलती है, और कम झपकने से वह परत सूखने लगती है।
दूसरी, सर्दी की सूखी हवा। उत्तर भारत में अक्टूबर के आखिर से हवा में नमी कम होने लगती है, और कमरे में हीटर या ब्लोअर इसे और सुखा देते हैं। तीसरी, प्रदूषण और धुआं, जो इन हफ्तों में हर साल बढ़ता है और आंखों में खुजली व जलन बढ़ाता है।
इसके ऊपर देर रात तक जागना, कम पानी पीना और त्योहारों की थकान भी जुड़ जाती है।
सूखी आंखों के आम लक्षण
- आंखों में जलन, चुभन या रेत जैसा महसूस होना
- आंखें लाल होना, खासकर शाम को
- पढ़ते या स्क्रीन देखते समय धुंधला लगना, जो पलक झपकने पर ठीक हो जाए
- अजीब बात है, पर कभी-कभी आंखों से ज़्यादा पानी आना भी, क्योंकि सूखी आंख जवाब में पानी छोड़ती है
- लेंस पहनने में तकलीफ
सूखी आंख, एलर्जी या संक्रमण: फर्क कैसे समझें
आंखों में खुजली और पानी आना हर बार सूखेपन की वजह से नहीं होता। मोटे तौर पर फर्क ऐसे समझ सकते हैं:
- सूखी आंख: जलन और रेत जैसा एहसास, शाम को और स्क्रीन के बाद ज़्यादा, दोनों आंखों में।
- एलर्जी: तेज़ खुजली, पतला पानी, अक्सर छींक या नाक बहने के साथ, धूल या धुएं के बाद बढ़ती है।
- संक्रमण: लाली के साथ गाढ़ा या पीला स्राव, सुबह पलकें चिपकी हुई, और अक्सर एक आंख से शुरू होकर दूसरी में फैलना।
संक्रमण का शक हो तो आंखें न मलें, अपना तौलिया अलग रखें और डॉक्टर को दिखाएं। एलर्जी और संक्रमण में दवा की ज़रूरत पड़ सकती है, जो सिर्फ आदतें बदलने से ठीक नहीं होते।
आयुर्वेद आंखों को कैसे देखता है
आयुर्वेद में आंख को पित्त का स्थान माना गया है, खासकर आलोचक पित्त का, जो देखने की क्षमता से जुड़ा है। ज़्यादा स्क्रीन, गर्मी, गुस्सा, देर रात जागना और तीखा-तला खाना पित्त बढ़ाते हैं, जिससे जलन और लाली होती है। वहीं सर्दी की रूखी हवा वात बढ़ाती है, जो सूखेपन से जुड़ा है।
इसीलिए आयुर्वेद आंखों के लिए ठंडक, नमी और आराम पर ज़ोर देता है, और नेत्र रोगों को बहुत गंभीरता से लेता है। आंख के अंदर कुछ भी डालने वाले उपचार, जैसे नेत्र तर्पण, आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही किए जाते हैं, घर पर नहीं।
स्क्रीन के लिए 20-20-20 नियम
यह सबसे आसान और सबसे असरदार आदत है जो मैंने अपनाई: हर 20 मिनट पर, 20 फुट दूर किसी चीज़ को, 20 सेकंड तक देखें। साथ में:
- जान-बूझकर पलक झपकाएं: कुछ बार पूरी तरह आंखें बंद करें, फिर खोलें।
- स्क्रीन की दूरी: लैपटॉप करीब एक हाथ दूर, और स्क्रीन आंखों की सीध से थोड़ी नीचे।
- रोशनी: अंधेरे कमरे में तेज़ स्क्रीन न देखें। रात को फोन की चमक कम रखें।
- सोने से पहले: कम से कम आधा घंटा फोन से दूर।
रोज़ की आयुर्वेदिक देखभाल
- पामिंग: दोनों हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और बंद आंखों पर हल्के से रखें, एक मिनट तक। स्क्रीन के बीच यह बहुत आराम देता है।
- ठंडा पानी: मुंह धोते समय बंद आंखों पर साफ, ठंडे पानी के छींटे मारें। आंखों के अंदर कुछ न डालें।
- पैरों के तलवों पर तेल: रात को सोने से पहले तलवों पर थोड़ा घी या तिल का तेल मलना आयुर्वेद में आंखों के लिए फायदेमंद माना गया है।
- पूरी नींद: सात से आठ घंटे। आंखें नींद में ही सबसे अच्छी तरह ठीक होती हैं।
- कमरे में नमी: हीटर चलाते समय कमरे में पानी का एक बर्तन रखें।
- चश्मा या लेंस: अगर नंबर पुराना है तो जांच करवाएं। गलत नंबर भी थकान और जलन बढ़ाता है। लेंस पहनने वाले स्क्रीन के लंबे दिनों में बीच-बीच में चश्मा पहनें।
एक ज़रूरी सावधानी: इंटरनेट पर त्रिफला आई वॉश के बारे में बहुत कुछ मिलता है। बिना आंखों के डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के त्रिफला, गुलाब जल या कोई भी घरेलू घोल आंख के अंदर न डालें। गलत तरीके से बना घोल संक्रमण कर सकता है।
आंखों के लिए क्या खाएं
ज़्यादा लें:
- गाजर, पपीता, कद्दू और शकरकंद, जो विटामिन A के अच्छे स्रोत हैं
- पालक, मेथी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां
- आंवला और खट्टे फल
- अखरोट और अलसी, जो ओमेगा-3 देते हैं
- दिन भर पर्याप्त पानी
- खाने में थोड़ा घी
कम करें:
- बहुत तीखा, तला और मसालेदार खाना, जो पित्त बढ़ाता है
- देर रात चाय-कॉफी
आंवले को आहार में शामिल करने का एक आसान तरीका हमारे आंवला कैप्सूल हैं, जो सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता और एंटीऑक्सीडेंट सहारे के लिए हैं। ये आंखों की दवा नहीं हैं। और अगर स्क्रीन के काम के साथ दिमागी थकान और तनाव भी रहता है, तो ब्राह्मी कैप्सूल मन को शांत रखने में सहारा दे सकते हैं, पर आंखों की समस्या के लिए नहीं।
कब तुरंत आंखों के डॉक्टर के पास जाएं
इनमें से कोई भी संकेत हो तो घरेलू देखभाल पर न रुकें:
- आंख में तेज़ दर्द
- अचानक धुंधला दिखना या नज़र कम होना
- रोशनी के चारों ओर घेरे दिखना
- आंख से पीला या गाढ़ा स्राव
- एक आंख का बहुत ज़्यादा लाल होना
- चोट या कुछ गिरने के बाद तकलीफ
- आराम और आदतें बदलने के बाद भी एक-दो हफ्ते तक जलन
आंखों की देखभाल में देर करना ठीक नहीं। कई गंभीर समस्याएं शुरू में सामान्य जलन जैसी ही लगती हैं।
मेरी सलाह
त्योहारों के ये हफ्ते आंखों पर भारी पड़ते हैं, पर छोटी आदतों से बड़ा फर्क पड़ता है। 20-20-20 नियम अपनाएं, पलकें झपकाना याद रखें, अच्छी नींद लें और आहार में हरी सब्ज़ियां व आंवला जोड़ें। आंख के अंदर कुछ भी डालने से पहले डॉक्टर से पूछें।
आंखों की देखभाल को लेकर कोई सवाल हो तो कमेंट में लिखिए।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। आंखों में दर्द, धुंधलापन या नज़र में अचानक बदलाव होने पर तुरंत आंखों के डॉक्टर से मिलें। कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें।