Lifestyle & Metabolic Health

हेमंत ऋतुचर्या — सर्दियों की आयुर्वेदिक दिनचर्या: क्या खाएं, क्या न खाएं और क्यों इस मौसम में भूख सबसे तेज़ होती है

हेमंत ऋतुचर्या – सर्दियों की आयुर्वेदिक दिनचर्या: क्या खाएं, क्या न खाएं

संक्षिप्त उत्तर

हेमंत ऋतु (लगभग मध्य नवंबर से मध्य जनवरी) में आयुर्वेद के अनुसार पाचन अग्नि साल में सबसे प्रबल होती है, इसलिए भूख बढ़ती है। इस मौसम में मीठा, खट्टा, नमकीन और घी-तेल युक्त पौष्टिक भोजन, तेल मालिश (अभ्यंग), व्यायाम और धूप लेनी चाहिए, जबकि ठंडा, रूखा और बासी आहार व लंबा उपवास टालना चाहिए।

मुख्य बातें

  • हेमंत ऋतु में जठराग्नि सबसे प्रबल होती है, इसलिए भूख अपने आप बढ़ जाती है।
  • मीठा, खट्टा, नमकीन रस और घी, तिल, गुड़, गेहूं, मौसमी सब्ज़ियां इस मौसम के लिए उपयुक्त हैं।
  • ठंडे पेय, रूखा-हल्का आहार और लंबे उपवास इस मौसम में टालने की सलाह है।
  • रोज़ तेल मालिश, व्यायाम और सुबह की धूप हेमंत दिनचर्या के मुख्य हिस्से हैं।
  • आंवला और अश्वगंधा जैसी रसायन जड़ी-बूटियां अपनी प्रकृति के अनुसार अपनाएं।

क्या आपने ग़ौर किया है कि नवंबर आते ही भूख अपने आप बढ़ जाती है? गाजर का हलवा, गुड़-तिल की चिक्की और सरसों का साग अचानक ज़्यादा अच्छे लगने लगते हैं। आयुर्वेद इसे संयोग नहीं मानता। उसके अनुसार इस मौसम में शरीर की पाचन अग्नि साल में सबसे प्रबल होती है।

इसी समझ पर आधारित है हेमंत ऋतुचर्या: सर्दियों की शुरुआत में खान-पान और दिनचर्या का वह तरीका, जो शरीर को पूरे साल के लिए ताक़त जमा करने देता है। चरक संहिता के सूत्रस्थान (अध्याय 6, तस्याशितीय) में ऋतुओं के अनुसार आहार-विहार का विस्तार से वर्णन है। इस लेख में उसी को आज की भाषा और आज की ज़िंदगी के हिसाब से समझते हैं।

हेमंत ऋतु कब होती है?

आयुर्वेद साल को छह ऋतुओं में बांटता है। हेमंत ऋतु मार्गशीर्ष (अगहन) और पौष, इन दो महीनों की होती है। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह मोटे तौर पर नवंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक पड़ती है। इसके बाद शिशिर ऋतु आती है, जो कड़ाके की सर्दी का समय है।

हेमंत विसर्ग काल का हिस्सा है, यानी वह समय जब सूर्य दक्षिणायन में होता है और प्रकृति शरीर को बल लौटाती है। इस काल में चंद्रमा का प्रभाव अधिक माना गया है, और भोजन में मधुर, अम्ल और लवण रस स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं।

इस मौसम में भूख तेज़ क्यों होती है?

चरक संहिता के अनुसार ठंडी हवा त्वचा के रोमछिद्रों को सिकोड़ देती है, जिससे शरीर की गर्मी बाहर कम निकलती है और भीतर पाचन अग्नि को बढ़ाती है। अगर इस प्रबल अग्नि को पर्याप्त, पोषक भोजन न मिले, तो आयुर्वेद कहता है कि वह शरीर की धातुओं को ही "पचाने" लगती है, जिससे वात बढ़ता है।

आसान भाषा में: हेमंत में भूखा रहना या बहुत हल्का, रूखा खाना नुक़सानदेह हो सकता है। यही वह मौसम है जब पौष्टिक, भारी और चिकने भोजन को शरीर सबसे अच्छी तरह पचा लेता है।

हेमंत ऋतु में क्या खाएं?

आयुर्वेद इस ऋतु में मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा) और लवण (नमकीन) रस वाले, स्निग्ध (चिकनाई युक्त) और पौष्टिक भोजन की सलाह देता है।

भोजन वर्ग हेमंत में उपयुक्त विकल्प
अनाज गेहूं, बाजरा, नया चावल, उड़द दाल
घी-तेल देसी घी, तिल का तेल, सरसों का तेल
दूध से बने दूध, दही (दिन में), मक्खन, पनीर
मीठा गुड़, गन्ने से बने पदार्थ, खजूर
बीज-मेवे तिल, बादाम, अखरोट, मूंगफली
सब्ज़ियां गाजर, शकरकंद, मेथी, पालक, सरसों का साग, मूली
फल आंवला, संतरा, अमरूद, बेर
मसाले अदरक, सोंठ, हल्दी, काली मिर्च, अजवाइन, लहसुन

चरक संहिता में इस ऋतु में मांस-रस और चिकनाई युक्त भोजन का भी उल्लेख है। शाकाहारी लोग इसकी जगह दालें, उड़द, तिल और मेवों से वही पोषण ले सकते हैं।

आंवला इस मौसम का ख़ास फल है। यह विटामिन C का प्राकृतिक स्रोत है और आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है। रोज़ एक ताज़ा आंवला, मुरब्बा या आंवले का रस हेमंत की दिनचर्या में आसानी से जुड़ सकता है।

हेमंत ऋतु में क्या न खाएं?

  • बहुत ठंडा, फ़्रिज से निकला खाना और ठंडे पेय
  • बहुत हल्का, रूखा और कम पोषक भोजन, जैसे सिर्फ़ सलाद या सूखे स्नैक्स पर गुज़ारा
  • लंबा उपवास या भोजन छोड़ना
  • रात में दही
  • बहुत कड़वे, कसैले और तीखे पदार्थों की अधिकता, क्योंकि ये वात को बढ़ाते हैं
  • बासी और बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड भोजन

हेमंत की दिनचर्या: 8 आदतें

  1. सुबह अभ्यंग (तेल मालिश): नहाने से 15-20 मिनट पहले तिल या सरसों के गुनगुने तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। यह त्वचा का रूखापन कम करता है और वात को शांत रखता है। सिर और पैरों के तलवों पर ख़ास ध्यान दें।
  2. व्यायाम: यह मौसम मेहनत वाले व्यायाम के लिए सबसे अनुकूल है। योग, तेज़ चलना, सूर्य नमस्कार या जिम, अपनी क्षमता के आधे बल तक व्यायाम करें, जैसा आयुर्वेद सलाह देता है।
  3. उबटन: मालिश के बाद बेसन, हल्दी या चने के आटे का उबटन लगाकर नहाने की परंपरा है।
  4. गुनगुने पानी से स्नान: बहुत गर्म पानी त्वचा को और रूखा करता है, इसलिए गुनगुना पानी बेहतर है।
  5. धूप सेंकना: सुबह की धूप शरीर को गर्मी देती है और विटामिन D का भी अच्छा स्रोत है।
  6. गर्म कपड़े: ऊनी कपड़ों से शरीर, ख़ासकर सिर, कान और पैर ढक कर रखें।
  7. गुनगुना पानी पिएं: प्यास कम लगने पर भी दिन भर थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीते रहें।
  8. नींद: सर्दियों की लंबी रातें शरीर को आराम देने के लिए हैं। समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना इस ऋतुचर्या का हिस्सा है।

हेमंत में उपयोगी जड़ी-बूटियां

  • अश्वगंधा: आयुर्वेद में बल और सहनशक्ति देने वाली, वात शांत करने वाली रसायन जड़ी-बूटी। सर्दियों में दूध के साथ लेने की परंपरा है।
  • आंवला: रसायन, ठंडी तासीर के बावजूद हर ऋतु में उपयोगी।
  • हल्दी: गर्म तासीर, कफ-वात शामक; हल्दी वाला दूध इस मौसम का प्रिय पेय।
  • सोंठ और अदरक: पाचन अग्नि को सहारा और सर्दी-जुकाम में राहत।
  • च्यवनप्राश: आंवला आधारित पारंपरिक रसायन, जो सर्दियों में बहुत से घरों में लिया जाता है।

इनमें से कोई भी जड़ी-बूटी नियमित रूप से लेने से पहले अपनी प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

आज की ज़िंदगी में हेमंत ऋतुचर्या कैसे अपनाएं?

हर किसी के पास रोज़ आधा घंटा मालिश का समय नहीं होता, और शहरों में सुबह की धूप भी स्मॉग में छिप जाती है। इसलिए छोटे बदलावों से शुरुआत करें:

  • हफ़्ते में कम से कम दो दिन अभ्यंग करें।
  • नाश्ता कभी न छोड़ें; दलिया, बेसन का चीला या मेवों वाला दूध अच्छे विकल्प हैं।
  • दिन में एक बार गुड़ और तिल की कोई चीज़ लें।
  • AQI ख़राब हो तो बाहर के बजाय घर के अंदर योग और व्यायाम करें।
  • रात का खाना जल्दी और गर्म खाएं।

एक ज़रूरी बात: भरपूर खाने की सलाह स्वस्थ पाचन वाले लोगों के लिए है। डायबिटीज़, मोटापा, दिल या किडनी की बीमारी वाले लोग अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही घी, गुड़ और मेवों की मात्रा तय करें।

यह भी पढ़ें:

निष्कर्ष

हेमंत ऋतु वह समय है जब शरीर की पाचन अग्नि सबसे प्रबल होती है। आयुर्वेद इसे पौष्टिक भोजन, तेल मालिश, व्यायाम और धूप के ज़रिए पूरे साल की ताक़त जमा करने का मौसम मानता है। मीठा, खट्टा, नमकीन और चिकनाई युक्त भोजन लें, ठंडे और रूखे आहार से बचें, और आंवला-अश्वगंधा जैसी रसायन जड़ी-बूटियों को अपनी प्रकृति के अनुसार अपनाएं। 👉 Aarogya Jeevanam के Amla Extract Capsules और Ashwagandha Extract Capsules देखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमंत और शिशिर ऋतु में क्या अंतर है?

हेमंत सर्दियों की शुरुआत (मध्य नवंबर से मध्य जनवरी) है, जबकि शिशिर इसके बाद की कड़ाके की ठंड (मध्य जनवरी से मध्य मार्च) है। दोनों की ऋतुचर्या काफ़ी मिलती-जुलती है।

क्या सर्दियों में दही खाना चाहिए?

दिन के समय, ताज़ा और कमरे के तापमान वाला दही ठीक माना जाता है। रात में दही से बचने की सलाह दी जाती है।

अभ्यंग के लिए कौन-सा तेल सबसे अच्छा है?

हेमंत में तिल का तेल सबसे ज़्यादा अनुशंसित है। सरसों का तेल भी उत्तर भारत में लोकप्रिय विकल्प है।

क्या हेमंत में वज़न बढ़ता है?

अगर पौष्टिक भोजन के साथ व्यायाम भी हो, तो यह मौसम ताक़त और मांसपेशियों के लिए अच्छा है। व्यायाम के बिना भारी भोजन से वज़न बढ़ सकता है।