कुछ साल पहले मेरी एक पाठिका ने लिखा कि वो दिन में दो बार ब्रश करती हैं, फ्लॉस भी करती हैं, फिर भी मसूड़ों से खून आता है। साथ में थकान रहती है और शरीर पर आसानी से नील पड़ जाते हैं। मैंने उन्हें खून की जांच करवाने की सलाह दी। रिपोर्ट में आयरन कम निकला और विटामिन C वाला खाना उनकी थाली से लगभग गायब था।
मसूड़ों से खून की सबसे आम वजह प्लाक है, यह सच है। पर जब सफाई ठीक होने के बाद भी खून आए, तो शरीर के अंदर झांकना ज़रूरी है। इस लेख में मैं उन पोषण की कमियों के बारे में बताऊंगा जो मसूड़ों पर असर डाल सकती हैं, उनके दूसरे लक्षण, कौन-सी जांचें मदद करती हैं, और भारतीय थाली से इन कमियों को कैसे पूरा करें।
पहले: क्या आपकी सफाई ठीक है?
कमियों की बात करने से पहले एक ईमानदार सवाल। क्या आप:
- दिन में दो बार, दो मिनट, नरम ब्रश से ब्रश करते हैं?
- रात को सोने से पहले ब्रश करते हैं?
- दांतों के बीच फ्लॉस करते हैं?
- पिछले एक साल में दंत चिकित्सक से सफाई करवाई है?
अगर इनमें से किसी का जवाब “नहीं” है, तो पहले यही सुधारें। ज़्यादातर मामलों में खून आना यहीं से रुक जाता है। अगर सब ठीक होने के बाद भी खून आता है, तो आगे पढ़ें।
विटामिन C: मसूड़ों का सबसे ज़रूरी पोषक तत्व
विटामिन C शरीर में कोलेजन बनाने के लिए ज़रूरी है। कोलेजन वो प्रोटीन है जो मसूड़ों, त्वचा और रक्त वाहिकाओं को मज़बूती देता है। इसकी कमी से मसूड़े कमज़ोर, सूजे हुए और जल्दी खून छोड़ने वाले हो सकते हैं।
बहुत गंभीर कमी को स्कर्वी कहते हैं, जो आज कम दिखती है, पर हल्की कमी काफी आम है, खासकर उन लोगों में जो:
- फल और कच्ची सब्ज़ियां कम खाते हैं
- सब्ज़ियों को बहुत देर तक पकाते हैं
- धूम्रपान करते हैं, क्योंकि यह शरीर में विटामिन C कम करता है
- बहुत सीमित या एक जैसा खाना खाते हैं
विटामिन C की कमी के दूसरे लक्षण: थकान, घाव धीरे भरना, त्वचा पर आसानी से नील पड़ना, जोड़ों में दर्द, और त्वचा का रूखापन।
भारतीय स्रोत:
- आंवला, जो विटामिन C के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है
- अमरूद
- संतरा, मौसमी, नींबू
- पपीता
- कच्चा टमाटर और हरी शिमला मिर्च
- अंकुरित दालें
टिप: विटामिन C गर्मी से नष्ट होता है। इसलिए कुछ फल और सब्ज़ियां कच्ची खाएं, और दाल-सब्ज़ी पर पकाने के बाद नींबू निचोड़ें।
आंवले को रोज़ के आहार में शामिल करने का एक आसान तरीका हमारे आंवला कैप्सूल हैं, जो सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए हैं। ये मसूड़ों का इलाज नहीं हैं, और ताज़े फलों की जगह नहीं ले सकते।
आयरन: खून की कमी और मसूड़े
भारत में आयरन की कमी से होने वाली खून की कमी (एनीमिया) बहुत आम है, खासकर महिलाओं में। एनीमिया में मसूड़े अक्सर पीले दिखते हैं, और कुछ लोगों में मसूड़ों की सूजन और मुंह में छाले भी बढ़ सकते हैं।
आयरन की कमी के दूसरे लक्षण: लगातार थकान, सांस फूलना, चक्कर, हाथ-पैर ठंडे रहना, नाखून कमज़ोर या चम्मच जैसे मुड़े होना, बाल झड़ना, और मिट्टी या बर्फ खाने की इच्छा।
भारतीय स्रोत:
- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: पालक, मेथी, सरसों, बथुआ
- दालें, राजमा, चना
- गुड़
- तिल
- बाजरा और रागी
- अंडे, मांस और मछली, जो लोग खाते हैं
टिप: आयरन के साथ विटामिन C लेने से आयरन बेहतर सोखा जाता है। पालक की सब्ज़ी के साथ नींबू, या खाने के बाद एक अमरूद। खाने के तुरंत बाद चाय पीने से आयरन का सोखना कम होता है, इसलिए एक घंटे का अंतर रखें।
विटामिन K: खून जमने के लिए
विटामिन K खून को जमने में मदद करता है। इसकी कमी आम नहीं है, पर कुछ आंतों की बीमारियों, लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने, या बहुत सीमित आहार में हो सकती है।
स्रोत: हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, पत्तागोभी, ब्रोकली।
ज़रूरी बात: अगर आप खून पतला करने की दवा लेते हैं, तो विटामिन K की मात्रा में अचानक बड़ा बदलाव न करें। अपने डॉक्टर से बात करें।
विटामिन B12 और फोलेट
इन दोनों की कमी से मुंह में छाले, जीभ में सूजन और लाली, और मसूड़ों में संवेदनशीलता हो सकती है। शाकाहारी लोगों में B12 की कमी काफी आम है।
दूसरे लक्षण: थकान, हाथ-पैरों में झुनझुनी, याददाश्त कमज़ोर होना, मूड में बदलाव।
स्रोत: दूध, दही, पनीर (B12); हरी सब्ज़ियां, दालें, अंकुरित अनाज (फोलेट)।
एक दिन की आसान थाली
नाश्ता: रागी या बाजरे का चीला, साथ में अमरूद।
दोपहर: दाल, पालक या मेथी की सब्ज़ी, रोटी, सलाद पर नींबू।
शाम: भुने चने और गुड़ का छोटा टुकड़ा।
रात: राजमा या मूंग, सब्ज़ी, दही।
इस थाली में विटामिन C, आयरन और फोलेट तीनों अच्छी मात्रा में हैं।
ध्यान दें कि रोज़ एक जैसी थाली ज़रूरी नहीं। हफ्ते भर में अलग-अलग दालें, मौसमी सब्ज़ियां और फल बदलते रहें, तो पोषण अपने आप संतुलित रहता है।
कौन-सी जांचें मदद कर सकती हैं
अगर सफाई ठीक होने के बाद भी खून आता है, और साथ में ऊपर बताए दूसरे लक्षण हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। वे ज़रूरत के हिसाब से ये जांचें सुझा सकते हैं:
- CBC (कम्प्लीट ब्लड काउंट): खून की कमी और प्लेटलेट्स की स्थिति
- आयरन प्रोफाइल / फेरिटिन
- विटामिन B12
- ब्लड शुगर / HbA1c: क्योंकि डायबिटीज़ भी मसूड़ों को प्रभावित करती है
- खून जमने की जांच: अगर नाक से भी खून आता हो या नील आसानी से पड़ते हों
खुद से ढेर सारे सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय पहले जांच करवाएं। ज़्यादा आयरन भी नुकसानदायक हो सकता है।
आयुर्वेद का नज़रिया
आयुर्वेद में रक्त धातु को स्वास्थ्य का एक प्रमुख आधार माना गया है, और उसकी गुणवत्ता को सही आहार और पाचन से जोड़ा गया है। आयुर्वेद कहता है कि आप जो खाते हैं, उससे ज़्यादा ज़रूरी है जो आप पचाते हैं। अगर पाचन कमज़ोर है, तो अच्छा खाना भी पूरा पोषण नहीं देता। आंवला को आयुर्वेद में रसायन माना गया है और यह रक्त व मसूड़ों के लिए पारंपरिक रूप से सराहा जाता है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- मसूड़ों के साथ नाक से भी बार-बार खून आना
- शरीर पर बिना चोट के नील या लाल धब्बे
- बहुत ज़्यादा थकान या सांस फूलना
- खून आना बंद ही न हो
ये संकेत खून से जुड़ी किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और इनमें देरी ठीक नहीं।
मेरी सलाह
मसूड़ों से खून आए, तो पहले ब्रश और फ्लॉस ठीक करें। फिर भी न रुके, तो थाली देखें और खून की जांच करवाएं। आंवला, अमरूद, हरी सब्ज़ियां और दालें आपकी थाली में रोज़ होनी चाहिए। और कोई भी सप्लीमेंट जांच के बाद, डॉक्टर की सलाह पर।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।