मैं आयुर्वेद और रोज़ की देखभाल के बारे में बहुत लिखता हूं: त्रिफला, आंवला, 20-20-20 नियम, अच्छी नींद। पर आज का लेख उल्टी दिशा में है। आज मैं उन संकेतों के बारे में लिख रहा हूं जिनमें घरेलू या आयुर्वेदिक देखभाल पर रुकना बिल्कुल ठीक नहीं, जहां हर घंटा मायने रखता है।
यह लेख मुझे लिखने की ज़रूरत तब महसूस हुई जब एक पाठक ने बताया कि उसके पिताजी ने एक आंख में अचानक “पर्दा-सा” दिखने को दो दिन तक थकान समझा, और गुलाब जल डालते रहे। जांच में रेटिना अलग होने (रेटिनल डिटैचमेंट) का पता चला। समय पर इलाज से कुछ नज़र बची, पर पूरी नहीं।
आंखों की कुछ समस्याएं मिनटों और घंटों में बढ़ती हैं। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि किन संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
आपातकालीन संकेत: तुरंत आंखों के अस्पताल जाएं
इन संकेतों में उसी दिन, बल्कि उसी घंटे, आंखों के डॉक्टर या अस्पताल जाएं:
1. अचानक नज़र चली जाना या बहुत कम हो जाना
एक या दोनों आंखों में, चाहे दर्द हो या न हो। यह आंख की नसों में खून का बहाव रुकने, रेटिना की समस्या या कई गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकता है।
2. आंख के आगे पर्दा या परछाई
जैसे नज़र के किसी हिस्से पर पर्दा गिर गया हो या काली परछाई आ रही हो। यह रेटिना अलग होने का क्लासिक संकेत है।
3. अचानक बहुत सारे “फ्लोटर्स” और रोशनी की चमक
कुछ तैरते धब्बे या धागे (फ्लोटर्स) उम्र के साथ सामान्य हैं। पर अगर अचानक बहुत सारे नए धब्बे दिखने लगें, साथ में बिजली जैसी चमक दिखे, तो यह रेटिना में छेद या दरार का संकेत हो सकता है।
4. तेज़ आंख दर्द, लाली, धुंधलापन, और रोशनी के चारों ओर घेरे, साथ में सिरदर्द और उल्टी
यह एक्यूट एंगल क्लोज़र ग्लूकोमा (काला मोतिया का अचानक हमला) हो सकता है, जिसमें आंख के अंदर का दबाव तेज़ी से बढ़ता है। यह आपातकाल है और कुछ ही घंटों में स्थायी नुकसान कर सकता है।
5. आंख में चोट
कोई चीज़ लगना, तेज़ धक्का, या कुछ धंस जाना। आंख को मलें नहीं, दबाएं नहीं, और धंसी चीज़ को खुद निकालने की कोशिश न करें।
6. आंख में केमिकल जाना
चूना, फिनाइल, सफाई का कोई केमिकल, या बैटरी का एसिड। तुरंत साफ, बहते पानी से कम से कम 15-20 मिनट तक आंख धोते रहें, और फिर तुरंत अस्पताल जाएं। दिवाली की सफाई के मौसम में यह खतरा बढ़ जाता है।
7. पटाखे से चोट
दिवाली में यह बहुत आम है। आंख को न मलें, न धोएं अगर चोट गहरी लगे, ढीली पट्टी या कप से ढकें और सीधे अस्पताल जाएं।
8. दोहरा दिखना, चेहरे का एक तरफ झुकना, बोलने में दिक्कत या हाथ-पैर में कमज़ोरी के साथ नज़र की समस्या
यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। तुरंत आपातकालीन सेवा को बुलाएं।
जल्द दिखाने वाले संकेत: एक-दो दिन के अंदर
ये आपातकाल नहीं, पर इन्हें टालना भी ठीक नहीं:
- आंख से गाढ़ा, पीला या हरा स्राव और सुबह पलकें चिपकना
- एक आंख का बहुत ज़्यादा लाल होना, साथ में दर्द या रोशनी से चुभन
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों में आंख का लाल होना और दर्द, क्योंकि लेंस से जुड़े संक्रमण तेज़ी से बढ़ सकते हैं
- पलक पर तेज़ सूजन या दर्द भरी गांठ
- आंख में कुछ गिरे होने का एहसास जो धोने से न जाए
नियमित जांच वाले संकेत: कुछ हफ्तों में
ये धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्याओं के संकेत हो सकते हैं:
- धीरे-धीरे धुंधलापन बढ़ना
- रात में देखने में दिक्कत
- रोशनी से चौंध बढ़ना
- रंग फीके लगना
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
- सीधी लाइनें टेढ़ी दिखना (यह मैक्युलर समस्या का संकेत हो सकता है, इसे जल्दी दिखाएं)
- किनारे की नज़र कम होना, यानी सामने देखते हुए बगल की चीज़ें न दिखना
- दो हफ्ते से ज़्यादा जलन या सूखापन
किन्हें ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए
- डायबिटीज़ वाले: डायबिटीज़ रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है, अक्सर बिना लक्षण के। साल में कम से कम एक बार पूरी आंख की जांच, पुतली फैलाकर।
- हाई ब्लड प्रेशर वाले।
- 40 से ऊपर के लोग: काला मोतिया (ग्लूकोमा) का खतरा बढ़ता है, जो शुरुआत में कोई लक्षण नहीं देता।
- परिवार में ग्लूकोमा या रेटिना की बीमारी का इतिहास।
- बहुत ज़्यादा माइनस नंबर वाले: रेटिना की समस्याओं का खतरा ज़्यादा।
- लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वाले।
अस्पताल जाते समय क्या साथ रखें
अपना चश्मा या लेंस का डिब्बा, चल रही दवाओं की सूची, और अगर केमिकल गया है तो उसकी बोतल या नाम। डॉक्टर को बताएं कि लक्षण कब और कैसे शुरू हुए। अगर अकेले हैं और नज़र कम है, तो खुद गाड़ी न चलाएं। किसी को साथ ले जाएं या टैक्सी बुलाएं।
ये गलतियां कभी न करें
- आंख में घरेलू घोल डालना: गुलाब जल, शहद, दूध, त्रिफला पानी, प्याज़ का रस, या कोई भी चीज़ बिना डॉक्टर की सलाह के आंख के अंदर न डालें। चेतावनी संकेतों में ये कीमती समय बर्बाद करते हैं और संक्रमण बढ़ा सकते हैं।
- दुकान से कोई भी आई ड्रॉप: स्टेरॉयड वाले ड्रॉप बिना निगरानी के ग्लूकोमा और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ाते हैं।
- “कल देखेंगे” कहना: ऊपर के आपातकालीन संकेतों में कल बहुत देर हो सकती है।
- चोट वाली आंख को मलना या दबाना।
आयुर्वेद और आंखों की आपातकालीन स्थिति
आयुर्वेद आंखों को बहुत गंभीरता से लेता है। शास्त्रों में आंखों को इंद्रियों में सबसे प्रमुख माना गया है, और नेत्र रोगों के लिए एक अलग विशेषज्ञता (शालाक्य तंत्र) का वर्णन है। आयुर्वेद की रोज़ की देखभाल, जैसे आंवला, त्रिफला का सेवन, घी, अच्छी नींद और आंखों का आराम, लंबे समय की सेहत के लिए हैं। आपातकाल में आयुर्वेद का भी पहला सिद्धांत यही होगा: पहले जीवन और अंग को बचाओ।
आंखों की सामान्य सेहत के लिए आहार में आंवला जोड़ना एक अच्छी आदत है, और हमारे आंवला कैप्सूल इसका एक विकल्प हैं। पर किसी भी चेतावनी संकेत में कोई सप्लीमेंट नहीं, सीधा डॉक्टर।
एक आसान घरेलू जांच
हर कुछ हफ्तों में एक-एक आंख ढककर दूर किसी चीज़, जैसे घड़ी या कैलेंडर, को देखिए। दोनों आंखों की नज़र की तुलना कीजिए। बहुत लोग सालों तक नहीं जानते कि उनकी एक आंख की नज़र कम हो चुकी है, क्योंकि दूसरी आंख कमी पूरी कर देती है। अगर फर्क लगे, तो जांच करवाएं।
मेरी सलाह
इस लेख को किसी ऐसे व्यक्ति को ज़रूर भेजिए जिसे डायबिटीज़ है, जो 50 से ऊपर है, या जो दिवाली पर पटाखे जलाता है। अचानक नज़र जाना, आंख के आगे पर्दा, बिजली जैसी चमक के साथ बहुत सारे धब्बे, तेज़ दर्द के साथ रोशनी के घेरे, चोट या केमिकल, इनमें एक मिनट भी न गंवाएं। आंखें दोबारा नहीं मिलतीं।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। आंखों की किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत नज़दीकी आंखों के अस्पताल या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।